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बनारस

हम सब में एक बनारस बसता है !!

चाय और याद.

चाय💜 वैसे चाय पर अक्सर वो बातें भी हो जाती है जो हम बोलने से कतराते है या बोल नहीं पाते..इसलिए मैं अक्सर तुम्हें चाय पर चलने का कहा करता था, की शायद कभी किसी दिन किसी चाय पर तुम्हें वो बात बोल सकू..ये वही चाय है, वही जगह और वही टेबल भी , यूँContinue reading “चाय और याद.”

इंतजार अगली कविता का..

प्रेम जब बीच में कही छूट जाता है या अपनाया नहीं जाता है तो अक्सर अंदर की भावना, किसी ना किसी रूप में बाहर निकलती है और जन्म होता है कविता का, उस कविता के माध्यम से लिखने वाला बताता है की उसमें कितना सामर्थ्य था, कितना  महत्वपूर्ण था कोई उसके लिए. जब नायक लिखताContinue reading “इंतजार अगली कविता का..”

आइना

आज जब आईने से सामना हुआ तो लगा जैसे ये चेहरा कई राज दबाये बैठा है.ढूंढ़ता है एकांत,जहाँ सुर्ख पड़ी आँखों सेकोई पानी की धारा  निकलना चाहती है. और उस आँसू धारा के साथ खत्म हो जायेगीवो सारी परेशानी.वो बातें जो चुभ रही थी जिनका दर्द में दबाये बैठा था अपने अंदर. पर डरता हूँ,Continue reading “आइना”

वक़्त

प्रेम की परिपाटी को  समझना, ब्राह्मण को समझने जैसा है, ब्राह्मण को समझना स्री को समझने जैसा है, स्री को समझना इतना आसान नहीं, इसलिए प्रेम को समझना आसान नहीं. कुछ चीज़ों में वक़्त लगता है उनकी कार्यशैली को समझने में, मैं बहुत ही अचंभित हो जाता हूँ जब सुनता हूँ ख़त के बारे में,Continue reading “वक़्त”

कविता – तोड़ के जंजीरे

तोड़ के जंजीरेमन की एक कदम बढ़ाया हैआज कुछ करने का ख्याल आया है. जो ना कर सकू उस काम कोकरने का बीड़ा उठाया है.जो रोचक ना था,  उसे भी  रोचक बनाया हैमैंने बड़े दिनों बादखुद में ये बदलाव पाया है| आग सी गर्मी,  गंगा सा तेज़चट्टानों सा दृढ़, मन बनया हैमैंने आज जीत काContinue reading “कविता – तोड़ के जंजीरे”

एक कहानी.

बेटा, तुम कल दुकान चले जाना, मुझे दिन में कही जाना है रतन के पापा ने रतन से कहाँ. रतन – अरे पापा अभी रिहर्सल चल रही है, नहीं हो पाएगा पापा – हाँ ठीक है थोड़ा देरी से चले जाना वहाँ. रतन – (चिढ़ते हुए ) पापा कौन सी ऐसी लाखों की कमाई होतीContinue reading “एक कहानी.”

गुब्बारा

गुब्बारे, वैसे तो गुब्बारे हम फुलाते ही फोडने के लिए है, ये हर छोटे, बड़े, घर के, बाहर के, सामाजिक, राजनैतिक सभी तरह के कार्यक्रमों का एक अभिन्न अंग होते है. पर जरा इस परिभाषित व्याख्या से हट कर सोचते है, यूँ तो गुब्बारे पर कई कविताएं लिखी जा चूँकि है. पर मसान फ़िल्म काContinue reading “गुब्बारा”

मुसाफ़िर

जिस पथ पर चलाग़ुमान कर बैठा.राह का मुसाफिरअभिमान कर बैठा. कदम कदम नाप रहा थाजो  राहों कोरास्ता खत्म होगा या नहीं इसबात पर परेशान हो बैठा. कंकर, पत्थर, कांटेजो होते है सफर के अलंकारमखमली रास्ता चुनअपनी अप्रत्याशित सफलतापर हैरान हो बैठा. मिला ही नहीं जो सबसे बड़ेअदब से इन रास्तों में,कहता है मैं रास्तों मेंगुमनामContinue reading “मुसाफ़िर”

एक कहानी

आज करीब एक साल बाद मैं और तारा मिल रहे थे.तारा बहुत दिनों बाद आज आई थी| तारा और मैं एक दूसरे से प्यार करते थे या नहीं,  इसका जवाब हम दोनों के पास नहीं थे बस एक रिश्ता था जिसे परिभाषित करना हम दोनों ने कभी जरुरी नहीं समझा. आज जब आई तो बड़ीContinue reading “एक कहानी”

प्रेम पर कविता.

प्रेम पर लिखी गई हर कविता अपूर्ण हैअगर वह पूर्ण होती तो शायद प्रेम परकोई नई कविता नहीं लिखना पड़ती. इस तरह से इस प्राणी जगत में सब का प्रेमकिसी ना किसी तरह से अपूर्ण है | प्रेम का उदगम  स्थल इस संसार के अंतिमछोर पर स्थित है,  जहाँ हम कभी चूक नहीं कर सकते|हमContinue reading “प्रेम पर कविता.”

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